दर्द-ए-दिल


आइये आ जाइये हाय अब आ जाइए
दूर जाने का सबब, जान-ए-जां फरमाए ।
हम तुम्हारे हो चुके अब, तुम बनो या ना बनो
दर्द-ए-दिल किसको सुनायें, इस बहाने आइये।
इस कदर ना रूठिये, हम मना ना पायेंगे
तोड़िये ना दिल हमारा, रूठकर ना जाईये ।
काली ज़ुल्फो की घटा, बरस ही ना जाये अब
इस तरह से कांधे पर, इनको न यूँ  लहराए ।
यूँ तो “निर्मल” प्यार की बाते कहाँ हो पायेंगी
चंद लमहों के लिये,  इस दिल को तो बहलाइए ।
                   ___हीराबल्लभ पाठक “निर्मल

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