विरहन की रात

विरहन की रात
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जवां है रात और दिल  बेचैन
झिलमिल तारे मुस्कुराता चाँद
सबब जीने का कोई बताये तो सही।
आंख में आंसू दिल में तड़फ
लव खामोस उफ़ ए अकेलापन
चैन की जुगत कोई बताये तो सही।
धड़कनें तेज होती हैं
उनका खयाल आते ही
उजड़े दयार में बहार का सबब
लेके कोई आये तो सही।
मैं तनहा और दिल मायूस
गुजर गयी रात फिर हुयी भोर
करूँ इन्तजार या नहीँ ?
फिर उसका कोई बताये तो सही।
रात आखिर रात होती है
विरहन की कयामत होती है
रात आये ही नहीं, साँझ के बाद
ऐसा फैसला कोई सुनाये तो सही ।
दो घड़ी के लिये ही सही “निर्मल”
भरोसा ही मुझको दे देता
मैं तेरा हूँ तू गम न कर ऐ दोस्त
मन को मेरे बहलाता तो सही।
……………बहलाता तो सही।
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           ___हीराबल्लभ पाठक “निर्मल”

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