नज़र में उसकी मुहब्बत का इशारा भी न था

नज़र में उसकी मुहब्बत का इशारा भी न थाबात करना यूँ मेरे दिल को गवारा भी न था।। दोस्त करते रहे चर्चे तेरी मुहब्बत केमुस्कुराने के सिवा पास में चारा भी न था।। वो जो इतराया करे…

शिक्षक

शिक्षक, गुरु, आचार्य,ये नहीं मात्र शब्दनहीं मात्र एक सामाजिक संबंधयह है एक आसआस यही, कि सम्भव है,सम्भव है हर प्रश्न का हलजो जीवन कर रहा है प्रतिपल,सहारा यह उस हाथ कागीली मिट्टी जो काढ़तानिर्मित करता रूप सुहानेरंग…

लिक्खूँ क्या सौंदर्य तुम्हारा

लिक्खूँ क्या सौंदर्य तुम्हारा?चूके शब्द, चकित मन हाराप्रिये कहाँ से शब्द वो लाऊँबरनै जो मृदु रूप तुम्हारा।। कौन से छंद में तुमको बाँधूँकहो तुम्हें मैं क्या उपमा दूँ?अलंकार वो कौन सा होगाव्यक्त करे जो रूप तुम्हारा? प्रेरणा…

हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार प्राचीन भारत में संगीत की स्थिति

हिन्दू जनजीवन में संगीत मुख्यतः दो प्रकार से सम्मिलित रहा है। पहला प्रकार विशुद्ध रूप से भक्तिसंगीत का है जिसके अंतर्गत अपने उपास्य की भक्ति तथा उसके गुणों का गान करना गायक अथवा भक्त का एकमात्र उद्देश्य…

हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार संगीत की उत्पत्ति

संगीत के प्रति मानव सर्वप्रथम कब तथा किस प्रकार आकर्षित हुआ, स्पष्ट रूप से कहना अत्यंत विवादास्पद होगा। किन्तु संभवतः जब मानव किसी अपार प्रसन्नता को पाकर अकस्मात् उछलने-कूदने लगा होगा, शायद वही उसका प्रारम्भिक नृत्य रहा…

मन का भीषण समर न देखा

मन का भीषण समर ना देखाभाग्य का मेरे भँवर ना देखाअपना कहलाने वालों नेहृदय का सूना घर ना देखा।। बाल्यकाल का हठ ना जानाना यौवन का स्वप्न ही जानामेरे सीमित साधन से जोकुछ था बाहर, उधर ना…

रूठकर तक़दीर ने इस तरह बदला लिया

रूठकर तक़दीर ने इस तरह बदला लियाहमने जो भी चाहा उसको ग़ैर का बना दिया।। ले के उम्मीदों की झोली जिसकी चौखट पर गएउसने हमको एक अनजाना पता बता दिया।। अपना जज़्बा ये कि उस पे जान…

तुझे याद करने का बस ये सिला है

तुझे याद करने का बस ये सिला हैनया रोज़ क़िस्सा जहां को मिला है। सतरंगी सपनों की दुनियाँ में हम-तुमक्या ही नज़र को नज़ारा मिला है।। उड़ते हैं गलियों में चर्चे हमारेचाहत भी वल्लाह कैसी बला है।।…

अपने किये की सफ़ाई न दो

अपने किये की सफ़ाई न दोजब हो भुगतना, दुहाई न दो।। दुनियाँ में कोई नहीं है फरिश्ताख़ुद को यूँ ख़ुद ही रिहाई न दो।। कहती है बीवी कि हाथों में माँ केमेहनत की अपनी कमाई न दो।।…

लोग कहते हैं सुधरने को तुझे

लोग कहते हैं सुधरने को तुझेऐ “बशर” ऐब क्या लगा है तुझे ?? प्यार के साथ ज़माना भी मिलेनहीं मुमकिन, कोई बतला दो उसे।। जूतियों के फटे तलवों में कईझुलसे पैरों का पता भी है मुझे।। बुलबुलों…

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