तुझे याद करने का बस ये सिला है

तुझे याद करने का बस ये सिला हैनया रोज़ क़िस्सा जहां को मिला है। सतरंगी सपनों की दुनियाँ में हम-तुमक्या ही नज़र को नज़ारा मिला है।। उड़ते हैं गलियों में चर्चे हमारेचाहत भी वल्लाह कैसी बला है।।…

अपने किये की सफ़ाई न दो

अपने किये की सफ़ाई न दोजब हो भुगतना, दुहाई न दो।। दुनियाँ में कोई नहीं है फरिश्ताख़ुद को यूँ ख़ुद ही रिहाई न दो।। कहती है बीवी कि हाथों में माँ केमेहनत की अपनी कमाई न दो।।…

लोग कहते हैं सुधरने को तुझे

लोग कहते हैं सुधरने को तुझेऐ “बशर” ऐब क्या लगा है तुझे ?? प्यार के साथ ज़माना भी मिलेनहीं मुमकिन, कोई बतला दो उसे।। जूतियों के फटे तलवों में कईझुलसे पैरों का पता भी है मुझे।। बुलबुलों…

बिन जिये लम्हे

बिन जिये ऐसे भीकुछ लम्हे होते हैंजो हमारी ज़िंदगी मेंशामिल नहीं होते हैंछोड़ देते हैं जिनकोहम अक्सर कुछ सोचकरदिल ही दिल में मग़रताउम्र रोते हैं।। डर कभी समाज काअनजानी कोई झिझकअलिखित नियम कोईकितने बंधन होते हैं।। बोझ…

कितना साथ निभाओगे ?

कितना साथ निभाओगे तुम ?कैसा साथ निभाओगे ?क्या तुम यह बतलाओगे प्रिय ?कैसा साथ निभाओगे ? होंगी नित मनुहार की बातेंप्रेम की और शृंगार की बातेंरुष्ट यदि मैं हुई कभी तोकटुक वचन सह पाओगे ?प्रिय कैसा साथ…

लाख की चूड़ियाँ

“लाख की चूड़ियां” कक्षा-8विषय-हिन्दी(कहानी का कविता रूपान्तरण) वो बैठता बूढ़े नीम तले,हवा चलती हौले -हौले.गुड़-गुड़ हूक्का उसकाबोले,लकड़ी की चौखटडग-मग डोले.बगल में भट्टीदहकाया करता,रोज लाखपिघलाया करता.सभी उसे काका,कहके बुलाते,रंग-बिरंगीचूड़ी बनवाते,गांव-गांव और,शहर-शहर में,चूड़ियाँ बिकती,हर अवसर में.सूहाग की चूड़ीखूब सुहाती,नव-वधु…

दोस्त बनके ही रहो

है तकाज़ा इश्क़ का अब दोस्त बनके ही रहोकह रही है दिलरुबा अब दोस्त बनके ही रहो।। जो कि मेरे नाम से मशहूर थी होने लगीवो कहीं कर आई वादा, दोस्त बनके ही रहो।। दिल कहे कि…

लब पे तेरा नाम आया

लब पे तेरा नाम आया, यूँ ख़ुदा के साथ मेंबंदगी औ इश्क़ दोनों, हो गए इक साँस में।। तोड़ दुनियाँ की रवायत, छोड़ इसकी उलझनेंमाँगने कुछ हूँ मैं आया, आज तेरे पास में।। इश्क़ का अब है…

भाव मेरे कब समझोगी

भाव मेरे कब समझोगी, कब मन के भीतर उतरोगी? सुनो प्रिये शब्दों से परे कब नयन की भाषा बरतोगी? नयन से तन-मन बेधोगी, कब अधर से आमंत्रण दोगी कहो कि कब इस हिरदय की आतुर याचना को…

राष्ट्रगौरव राम

भाव हो कर्तव्य का, तुम प्रेम का संचार हो राम जननायक, नरोत्तम, अखिल जगदाधार हो।। दीनजन के सहज सम्बल, आर्तजन की पुकार हो तृप्ति हो उपकार की, करुणा के तुम भण्डार हो।। सीमा मर्यादा की हो, गुण-रूप…

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