समर्पण

समर्पण🌹🌿🌹जोगिया रे ! चला कहाँ ?पीछे मुडकर देख जरा, यह स्वर्णिम संसार।नहीं-नहीं यह धोखा हैइसके पीछे मत हो पागल, यह खोटा बाजार।अरे ओ पगले! देख जरापरियों सी है सूरत मेरी, भटक रहा क्यूँ जार-जार।तेरी सूरत ढल जायेगीतू…

तुझे याद करने का बस ये सिला है

तुझे याद करने का बस ये सिला हैनया रोज़ क़िस्सा जहां को मिला है। सतरंगी सपनों की दुनियाँ में हम-तुमक्या ही नज़र को नज़ारा मिला है।। उड़ते हैं गलियों में चर्चे हमारेचाहत भी वल्लाह कैसी बला है।।…

अपने किये की सफ़ाई न दो

अपने किये की सफ़ाई न दोजब हो भुगतना, दुहाई न दो।। दुनियाँ में कोई नहीं है फरिश्ताख़ुद को यूँ ख़ुद ही रिहाई न दो।। कहती है बीवी कि हाथों में माँ केमेहनत की अपनी कमाई न दो।।…

बुद्धिभ्रम

*बुद्धिभ्रम*खुश था मैं मगर एक दिनमिल गयी मैकाले वालीशिक्षा से उपजी हुई बुद्धिउसने मुझे बरगला दियाबरगला क्या पगला दियादेखने लगा मैं बुराइयाँअपने धर्म अपने समाज मेंअपने ग्रन्थ और पुराणों मेंभगवान मेरे दुश्मन हो गयेमन्दिर मुझे नापसन्द हो…

लोग कहते हैं सुधरने को तुझे

लोग कहते हैं सुधरने को तुझेऐ “बशर” ऐब क्या लगा है तुझे ?? प्यार के साथ ज़माना भी मिलेनहीं मुमकिन, कोई बतला दो उसे।। जूतियों के फटे तलवों में कईझुलसे पैरों का पता भी है मुझे।। बुलबुलों…

प्रीतम

आज मेरे घर प्रीतम आये,               करूंगी सोला शृंगार री सखि ।सेज सजाओ फूलन से और,                             बांधो बन्दनवार री,प्रीतम मेरा छैल छवीला,                डारूंगी तन मन वार री सखि।कंगना झुमका पहिर के जाऊँ,                           माँग सिन्दूर भराऊंगी,गले लगाऊं प्रीतम को,                   …

बेटी

बेटी हर घर का श्रृंगार है बेटीश्रृष्टि का उपहार है बेटीआशा का संचार है बेटीयुगों-युगों का धर्म है बेटीतेरी बेटी मेरी बेटीअमृत रस की धार है बेटीघर आँगन की रंगोली औरप्रकृति का आधार है बेटीबेटी बिन घर…

विरहन की रात

विरहन की रात===×==×===जवां है रात और दिल  बेचैनझिलमिल तारे मुस्कुराता चाँदसबब जीने का कोई बताये तो सही।आंख में आंसू दिल में तड़फलव खामोस उफ़ ए अकेलापनचैन की जुगत कोई बताये तो सही।धड़कनें तेज होती हैंउनका खयाल आते…

जङ्गल में मंगल

जङ्गल में  मंगल⚘🌿⚘🌿⚘हाथी दादा सूंड हिलाते, बड़ी जोर से चिंघाड़ाबन्दर ने गुलाटी मारी, खों खों करता भागा।भालू बोला कहाँ जात हो, तनिक इधर तो आओवो देखो शहद का छत्ता, मिलकर खायें दोनों ।बन्दर मामा खुश होकर, लगे…

बिन जिये लम्हे

बिन जिये ऐसे भीकुछ लम्हे होते हैंजो हमारी ज़िंदगी मेंशामिल नहीं होते हैंछोड़ देते हैं जिनकोहम अक्सर कुछ सोचकरदिल ही दिल में मग़रताउम्र रोते हैं।। डर कभी समाज काअनजानी कोई झिझकअलिखित नियम कोईकितने बंधन होते हैं।। बोझ…

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