लिक्खूँ क्या सौंदर्य तुम्हारा

लिक्खूँ क्या सौंदर्य तुम्हारा?चूके शब्द, चकित मन हाराप्रिये कहाँ से शब्द वो लाऊँबरनै जो मृदु रूप तुम्हारा।। कौन से छंद में तुमको बाँधूँकहो तुम्हें मैं क्या उपमा दूँ?अलंकार वो कौन सा होगाव्यक्त करे जो रूप तुम्हारा? प्रेरणा…

मन का भीषण समर न देखा

मन का भीषण समर ना देखाभाग्य का मेरे भँवर ना देखाअपना कहलाने वालों नेहृदय का सूना घर ना देखा।। बाल्यकाल का हठ ना जानाना यौवन का स्वप्न ही जानामेरे सीमित साधन से जोकुछ था बाहर, उधर ना…

रूठकर तक़दीर ने इस तरह बदला लिया

रूठकर तक़दीर ने इस तरह बदला लियाहमने जो भी चाहा उसको ग़ैर का बना दिया।। ले के उम्मीदों की झोली जिसकी चौखट पर गएउसने हमको एक अनजाना पता बता दिया।। अपना जज़्बा ये कि उस पे जान…

तुझे याद करने का बस ये सिला है

तुझे याद करने का बस ये सिला हैनया रोज़ क़िस्सा जहां को मिला है। सतरंगी सपनों की दुनियाँ में हम-तुमक्या ही नज़र को नज़ारा मिला है।। उड़ते हैं गलियों में चर्चे हमारेचाहत भी वल्लाह कैसी बला है।।…

अपने किये की सफ़ाई न दो

अपने किये की सफ़ाई न दोजब हो भुगतना, दुहाई न दो।। दुनियाँ में कोई नहीं है फरिश्ताख़ुद को यूँ ख़ुद ही रिहाई न दो।। कहती है बीवी कि हाथों में माँ केमेहनत की अपनी कमाई न दो।।…

लोग कहते हैं सुधरने को तुझे

लोग कहते हैं सुधरने को तुझेऐ “बशर” ऐब क्या लगा है तुझे ?? प्यार के साथ ज़माना भी मिलेनहीं मुमकिन, कोई बतला दो उसे।। जूतियों के फटे तलवों में कईझुलसे पैरों का पता भी है मुझे।। बुलबुलों…

बिन जिये लम्हे

बिन जिये ऐसे भीकुछ लम्हे होते हैंजो हमारी ज़िंदगी मेंशामिल नहीं होते हैंछोड़ देते हैं जिनकोहम अक्सर कुछ सोचकरदिल ही दिल में मग़रताउम्र रोते हैं।। डर कभी समाज काअनजानी कोई झिझकअलिखित नियम कोईकितने बंधन होते हैं।। बोझ…

कितना साथ निभाओगे ?

कितना साथ निभाओगे तुम ?कैसा साथ निभाओगे ?क्या तुम यह बतलाओगे प्रिय ?कैसा साथ निभाओगे ? होंगी नित मनुहार की बातेंप्रेम की और शृंगार की बातेंरुष्ट यदि मैं हुई कभी तोकटुक वचन सह पाओगे ?प्रिय कैसा साथ…

क्या नहीं है पहाड़ में?

///////■\\\\\\\धरा क्या है पहाड़ में ?ऐसा कहने लगे हैं लोगभुला ! क्या नहीं है पहाड़ मेंसुन्दर हरियाली ठंडा पानीहिसाऊ काफल सेव की दाणीबांज बुरांस आड़ू खुबानीबेड़ू तिमिले और नारंगी थोड़ा सा बनना पड़ता है पहाड़ी ।नदियाँ झरने देवों…

लाख की चूड़ियाँ

“लाख की चूड़ियां” कक्षा-8विषय-हिन्दी(कहानी का कविता रूपान्तरण) वो बैठता बूढ़े नीम तले,हवा चलती हौले -हौले.गुड़-गुड़ हूक्का उसकाबोले,लकड़ी की चौखटडग-मग डोले.बगल में भट्टीदहकाया करता,रोज लाखपिघलाया करता.सभी उसे काका,कहके बुलाते,रंग-बिरंगीचूड़ी बनवाते,गांव-गांव और,शहर-शहर में,चूड़ियाँ बिकती,हर अवसर में.सूहाग की चूड़ीखूब सुहाती,नव-वधु…

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