राष्ट्रगौरव राम

भाव हो कर्तव्य का, तुम प्रेम का संचार हो राम जननायक, नरोत्तम, अखिल जगदाधार हो।। दीनजन के सहज सम्बल, आर्तजन की पुकार हो तृप्ति हो उपकार की, करुणा के तुम भण्डार हो।। सीमा मर्यादा की हो, गुण-रूप…

महादेव स्तुति

शूलपाणि हे महादेव हे विश्वनाथ उद्धार करो राम-कृष्ण की पुण्यभूमि में अतुल शौर्य संचार करो।। विश्वरूप हे महाकाल भयनाश करो, भवत्राष हरो मुख तेजोमय, धीर हृदय हों, मन में स्वच्छ विचार भरो।। रामचंद्र सी राजनीति हो, कूटनीति…

ग़ज़ल – तमाम मुश्किलें, मजबूरियाँ, हालात रहने दे

तमाम मुश्किलें, मजबूरियाँ, हालात रहने दे प्यार कर बैठा हूँ तुझसे, तो प्यार रहने दे।। जज़्बा ए इश्क़ नहीं उम्र का मोहताज़ कभी तू अपनी उम्र का होश ओ हिसाब रहने दे।। इश्क़ महबूब से जो है…

निर्मोही

निर्मोही ! तू चला कहाँमुझे छोड़  इस निर्जन वन में ।खड़े भेड़िये अनगिनतजीभ लपलपाते मानव तन में ।मनुष्यता यहाँ नहीं हैदानवता का तम फैलासूरज भी असहाय साविचर रहा है नीलगगन में ।वनचर भी हैं उदासदेख भेड़ियों की…

कहाँ है भगवान्

हम स्वयं को जानते नहींबातें  बुजुर्गों की मानते नहींकहाँ है भगवान ? हम कहते हैंअपने आस-पास देखते नहीं ?वो देखो खिलती कलियों कोकल-कल करती नदियों कोझर-झर बहते झरने कोगरजते मचलते सागर कोक्या इनमें भी नजर आता नहीं…

अपना तो शृंगार है हिन्दी

डॉ0 शशि जोशी जी की सुंदर कविता सरल मधुर व्यवहार है हिंदी!अपना तो शृंगार है हिंदी ! भावशिखर से गिरती झर-झर..शीतल जल की धार है हिंदी ! “सूर” की “कान्हा” बनकर किलकी,मीरा की स्वरधार है हिंदी !…

विनय

मैली इस तन की चादर कोधोऊं किस पानी सेकौनो जतन बताओ मुझकोउजली होवे फिर से। धोऊं किस पानी सेज्ञान नहीं कोई ध्यान नहीं हैना जप तप ना पूजामारग कठिन है प्रभु से मिलन कातारण हो किस विधि…

दर्द-ए-दिल

आइये आ जाइये हाय अब आ जाइएदूर जाने का सबब, जान-ए-जां फरमाए ।हम तुम्हारे हो चुके अब, तुम बनो या ना बनोदर्द-ए-दिल किसको सुनायें, इस बहाने आइये।इस कदर ना रूठिये, हम मना ना पायेंगेतोड़िये ना दिल हमारा,…

उदासी

तुम जब उदास होती होसखि  ! मन मेरा घबराता हैइन अलसाई आँखों मेंसमन्दर नजर आता है।हँसती रहो हँसती हुई तुमकितनी अच्छी लगती होकि जैसे चाँद पूनम काहर तरफ नजर आता है ।यूँ तो उदासी  किसी की होकभी…

चुनरी (भजन)

चुनरी में लागा दाग रीअब कौंनो जतन करूँ ।चुनरी मोरी रंग रंगीलीया में जड़े थे हरि नाम के मोतीकबहुँ न कीनो राग री। अब कौनो….नाहीं जप तप भजन न कीनाहरि सुमिरन तो कबहुँ न कीनाफूटे मेरे भाग…

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