अपना तो शृंगार है हिन्दी

डॉ0 शशि जोशी जी की सुंदर कविता सरल मधुर व्यवहार है हिंदी!अपना तो शृंगार है हिंदी ! भावशिखर से गिरती झर-झर..शीतल जल की धार है हिंदी ! “सूर” की “कान्हा” बनकर किलकी,मीरा की स्वरधार है हिंदी !…

विनय

मैली इस तन की चादर कोधोऊं किस पानी सेकौनो जतन बताओ मुझकोउजली होवे फिर से। धोऊं किस पानी सेज्ञान नहीं कोई ध्यान नहीं हैना जप तप ना पूजामारग कठिन है प्रभु से मिलन कातारण हो किस विधि…

दर्द-ए-दिल

आइये आ जाइये हाय अब आ जाइएदूर जाने का सबब, जान-ए-जां फरमाए ।हम तुम्हारे हो चुके अब, तुम बनो या ना बनोदर्द-ए-दिल किसको सुनायें, इस बहाने आइये।इस कदर ना रूठिये, हम मना ना पायेंगेतोड़िये ना दिल हमारा,…

उदासी

तुम जब उदास होती होसखि  ! मन मेरा घबराता हैइन अलसाई आँखों मेंसमन्दर नजर आता है।हँसती रहो हँसती हुई तुमकितनी अच्छी लगती होकि जैसे चाँद पूनम काहर तरफ नजर आता है ।यूँ तो उदासी  किसी की होकभी…

चुनरी (भजन)

चुनरी में लागा दाग रीअब कौंनो जतन करूँ ।चुनरी मोरी रंग रंगीलीया में जड़े थे हरि नाम के मोतीकबहुँ न कीनो राग री। अब कौनो….नाहीं जप तप भजन न कीनाहरि सुमिरन तो कबहुँ न कीनाफूटे मेरे भाग…

अपना देस अपना परिवेश

खुश था मैं मगर एक दिनमिल गयी मैकाले वालीशिक्षा से उपजी हुई बुद्धिउसने मुझे बरगला दियाबरगला क्या पगला दियादेखने लगा मैं बुराइयाँअपने धर्म अपने समाज मेंअपने ग्रन्थ और पुराणों मेंभगवान मेरे दुश्मन हो गयेमन्दिर मुझे नापसन्द हो…

निवेदन

हे परमेश्वर! हे जगदीश्वर!जग है सारा तुमपर निर्भरसाकार हो तुम और निर्विकार भीजल थल के तुम ही आधार । हे परमेश्वर!सृष्टि बनाई जगत् रचायापशु पक्षी और वनचर जायालता वृक्ष और पुष्प बनायेधरती के शृंगार सजायेसोच तुम्हारी अपरम्पार।…

ग़ज़ल – है तकाज़ा इश्क़ का, अब दोस्त बनके ही रहो

है तकाज़ा इश्क़ का अब दोस्त बनके ही रहोकह रही है दिलरुबा अब दोस्त बनके ही रहो।। जो कि मेरे नाम से मशहूर थी होने लगीवो कहीं कर आई वादा, दोस्त बनके ही रहो।। दिल कहे कि…

ग़ज़ल – लब पे तेरा नाम आया

लब पे तेरा नाम आया, यूँ ख़ुदा के साथ मेंबंदगी औ इश्क़ दोनों, हो गए इक साँस में।। तोड़ दुनियाँ की रवायत, छोड़ इसकी उलझनेंमाँगने कुछ मैं हूँ आया, आज तेरे पास में।। इश्क़ का अब है…

माँ

लिखने चला तुझपे कविता माँमन के मृदुल भावों को जगाबुद्धि, लेखनी दोनों हैं चुपहृदय निरंतर बोल रहा।। प्रथम गुरु तुम प्रथम प्रेयसीप्रथम ईश इस जीवन कीतुम दाता इस तन औ प्राण कीमैं तो बस याचक ठहरा। तेरी…

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