हिन्दू धर्म एवं संगीत का अंतःसंबंध

प्रायः सभी हिन्दू धर्मग्रंथों के अध्ययन से ज्ञात होता है कि प्राचीन भारतीय संस्कृति में संगीतकला का अति महत्वपूर्ण स्थान रहा है। हिन्दू धर्मग्रंथों में जहाँ कहीं भी किसी हर्षपूर्ण घटना, अथवा मंगलकार्य संबंधी प्रसंग का वर्णन…

प्रस्तावना – हिन्दू धर्मग्रंथों में संगीत

भारतभूमि प्रारंभिक काल से ही कला-संस्कृत, विज्ञान तथा धार्मिक विषयक अन्वेषण का केंद्र रही है। हज़ारों वर्षों पूर्व जब विश्व की अधिकांश सभ्यताएँ अज्ञान के घोर अंधकार में आकण्ठ डूबी हुई थीं तब यहां के ऋषि-मुनिगण पवित्र…

सरयू से सागर तक भाग 340

यथास्थितिवादी समाज में जिजीविषा का अभाव होता है।जिजीविषा का अभाव सामाजिक गतिहीनता के रूप में यथास्थितिवादी होता है।इस तरह यथास्थितिवादी होना सामाजिक जड़त्व का होना होता है।वैसे भी समाज जटिलताओं एवम सहजता का समुच्चय है।प्राकृतिक घटकों की…

हिन्दू धर्मग्रंथों में संगीत (प्रमुख हिन्दू धर्मग्रंथ)

प्रायः प्रत्येक धर्म के कुछ प्रमुख ग्रंथ होते हैं, जिसमें उस धर्म की प्रमुख शिक्षाओं तथा मान्यताओं का उल्लेख होता है। हिन्दू धर्म सदैव ही एक चिंतनशील धर्म के रूप में ख्यात रहा है। अतः यहाँ धार्मिक…

हिन्दू धर्मग्रंथों में संगीत

अध्याय एक- हिन्दू धर्म एवं उसके प्रमुख धर्मग्रंथ।। हिन्दू धर्मग्रंथों में संगीतअध्याय एक – हिन्दू धर्म एवं उसके प्रमुख ग्रंथहिन्दू धर्मग्रंथों में संगीत से पूर्व हिन्दू धर्म,इसकी प्रमुख मान्यताओं तथा इसके प्रमुख ग्रंथों पर चर्चा करना मेरे…

सरयू से सागर तक भाग – 327

मन मष्तिष्क की अत्यंत सूक्ष्म अभिव्यक्ति है।बस्तुतः मष्तिष्क की रचना धर्मिता ही मन है।जिसको केंद्रीय स्नायुतन्त्र कहते हैं।हम सबका केंद्रीय स्नायुतन्त्र इतना संवेदनशील होता है कि हमारी दैनिक जीवन की सारी कार्यविधियों का संचालक मन होता है।यहां…

प्रस्तावना – हिन्दू धर्मग्रंथों में संगीत।

भारतभूमि प्रारंभिक काल से ही कला-संस्कृत, विज्ञान तथा धार्मिक विषयक अन्वेषण का केंद्र रही है। हज़ारों वर्षों पूर्व जब विश्व की अधिकांश सभ्यताएँ अज्ञान के घोर अंधकार में आकण्ठ डूबी हुई थीं तब यहां के ऋषि-मुनिगण पवित्र…

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