भोर की बतियां

भोर की बतियां⚘🌿🌺🌿⚘जब भयी भोर उजियारा छायाकलियाँ खिली और मन मुस्कायापंछी चले दाना चुगनेपनघट पर पनिहारन का झुंड आया।आपस में यूं करती बतियांक्यों री ! तूने नहीं बतायातेरा पिया घर आया है, बोल क्या क्या लाया।माथे की…

वन्दे मातरम्

वन्दे मातरम्🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳सूरज निकला सुबह सबेरे,चहक उठी हैं चिड़ियां।मेरे घर आंगन में देखो, महक उठी हैं  कलियां।रात गयी और बात गयी, खेलन लागी सखियां ।आओ नन्हीं आओ मुन्नी, प्यारी है यह दुनियां ।खेल-खेल में शहर बसाया, और बना…

हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार प्राचीन भारत में संगीत की स्थिति

हिन्दू जनजीवन में संगीत मुख्यतः दो प्रकार से सम्मिलित रहा है। पहला प्रकार विशुद्ध रूप से भक्तिसंगीत का है जिसके अंतर्गत अपने उपास्य की भक्ति तथा उसके गुणों का गान करना गायक अथवा भक्त का एकमात्र उद्देश्य…

हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार संगीत की उत्पत्ति

संगीत के प्रति मानव सर्वप्रथम कब तथा किस प्रकार आकर्षित हुआ, स्पष्ट रूप से कहना अत्यंत विवादास्पद होगा। किन्तु संभवतः जब मानव किसी अपार प्रसन्नता को पाकर अकस्मात् उछलने-कूदने लगा होगा, शायद वही उसका प्रारम्भिक नृत्य रहा…

अलग दुनियाँ

अलग दुनियाँ●बसा लेते हैं अलग दुनियाँ, बेटे जवान होने परक्या करें वो बूढे माँ-बाप, बेसहारा हो जाने पर ।पाला था बड़े नाजों से, बुढापे का होगा सहारावो तो छुड़ा गया दामन, ब्याहता हो जाने पर ।खयाल आया…

मन का भीषण समर न देखा

मन का भीषण समर ना देखाभाग्य का मेरे भँवर ना देखाअपना कहलाने वालों नेहृदय का सूना घर ना देखा।। बाल्यकाल का हठ ना जानाना यौवन का स्वप्न ही जानामेरे सीमित साधन से जोकुछ था बाहर, उधर ना…

रूठकर तक़दीर ने इस तरह बदला लिया

रूठकर तक़दीर ने इस तरह बदला लियाहमने जो भी चाहा उसको ग़ैर का बना दिया।। ले के उम्मीदों की झोली जिसकी चौखट पर गएउसने हमको एक अनजाना पता बता दिया।। अपना जज़्बा ये कि उस पे जान…

समर्पण

समर्पण🌹🌿🌹जोगिया रे ! चला कहाँ ?पीछे मुडकर देख जरा, यह स्वर्णिम संसार।नहीं-नहीं यह धोखा हैइसके पीछे मत हो पागल, यह खोटा बाजार।अरे ओ पगले! देख जरापरियों सी है सूरत मेरी, भटक रहा क्यूँ जार-जार।तेरी सूरत ढल जायेगीतू…

तुझे याद करने का बस ये सिला है

तुझे याद करने का बस ये सिला हैनया रोज़ क़िस्सा जहां को मिला है। सतरंगी सपनों की दुनियाँ में हम-तुमक्या ही नज़र को नज़ारा मिला है।। उड़ते हैं गलियों में चर्चे हमारेचाहत भी वल्लाह कैसी बला है।।…

अपने किये की सफ़ाई न दो

अपने किये की सफ़ाई न दोजब हो भुगतना, दुहाई न दो।। दुनियाँ में कोई नहीं है फरिश्ताख़ुद को यूँ ख़ुद ही रिहाई न दो।। कहती है बीवी कि हाथों में माँ केमेहनत की अपनी कमाई न दो।।…

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