बुद्धिभ्रम

*बुद्धिभ्रम*खुश था मैं मगर एक दिनमिल गयी मैकाले वालीशिक्षा से उपजी हुई बुद्धिउसने मुझे बरगला दियाबरगला क्या पगला दियादेखने लगा मैं बुराइयाँअपने धर्म अपने समाज मेंअपने ग्रन्थ और पुराणों मेंभगवान मेरे दुश्मन हो गयेमन्दिर मुझे नापसन्द हो…

लोग कहते हैं सुधरने को तुझे

लोग कहते हैं सुधरने को तुझेऐ “बशर” ऐब क्या लगा है तुझे ?? प्यार के साथ ज़माना भी मिलेनहीं मुमकिन, कोई बतला दो उसे।। जूतियों के फटे तलवों में कईझुलसे पैरों का पता भी है मुझे।। बुलबुलों…

प्रीतम

आज मेरे घर प्रीतम आये,               करूंगी सोला शृंगार री सखि ।सेज सजाओ फूलन से और,                             बांधो बन्दनवार री,प्रीतम मेरा छैल छवीला,                डारूंगी तन मन वार री सखि।कंगना झुमका पहिर के जाऊँ,                           माँग सिन्दूर भराऊंगी,गले लगाऊं प्रीतम को,                   …

बेटी

बेटी हर घर का श्रृंगार है बेटीश्रृष्टि का उपहार है बेटीआशा का संचार है बेटीयुगों-युगों का धर्म है बेटीतेरी बेटी मेरी बेटीअमृत रस की धार है बेटीघर आँगन की रंगोली औरप्रकृति का आधार है बेटीबेटी बिन घर…

विरहन की रात

विरहन की रात===×==×===जवां है रात और दिल  बेचैनझिलमिल तारे मुस्कुराता चाँदसबब जीने का कोई बताये तो सही।आंख में आंसू दिल में तड़फलव खामोस उफ़ ए अकेलापनचैन की जुगत कोई बताये तो सही।धड़कनें तेज होती हैंउनका खयाल आते…

जङ्गल में मंगल

जङ्गल में  मंगल⚘🌿⚘🌿⚘हाथी दादा सूंड हिलाते, बड़ी जोर से चिंघाड़ाबन्दर ने गुलाटी मारी, खों खों करता भागा।भालू बोला कहाँ जात हो, तनिक इधर तो आओवो देखो शहद का छत्ता, मिलकर खायें दोनों ।बन्दर मामा खुश होकर, लगे…

बिन जिये लम्हे

बिन जिये ऐसे भीकुछ लम्हे होते हैंजो हमारी ज़िंदगी मेंशामिल नहीं होते हैंछोड़ देते हैं जिनकोहम अक्सर कुछ सोचकरदिल ही दिल में मग़रताउम्र रोते हैं।। डर कभी समाज काअनजानी कोई झिझकअलिखित नियम कोईकितने बंधन होते हैं।। बोझ…

कितना साथ निभाओगे ?

कितना साथ निभाओगे तुम ?कैसा साथ निभाओगे ?क्या तुम यह बतलाओगे प्रिय ?कैसा साथ निभाओगे ? होंगी नित मनुहार की बातेंप्रेम की और शृंगार की बातेंरुष्ट यदि मैं हुई कभी तोकटुक वचन सह पाओगे ?प्रिय कैसा साथ…

क्या नहीं है पहाड़ में?

///////■\\\\\\\धरा क्या है पहाड़ में ?ऐसा कहने लगे हैं लोगभुला ! क्या नहीं है पहाड़ मेंसुन्दर हरियाली ठंडा पानीहिसाऊ काफल सेव की दाणीबांज बुरांस आड़ू खुबानीबेड़ू तिमिले और नारंगी थोड़ा सा बनना पड़ता है पहाड़ी ।नदियाँ झरने देवों…

चाँद और सपना

देखो कितना प्यारा             लगता है चाँद गगन मेंजैसे मुखड़ा प्रियतम काउतरा हो दर्पण में । देखो…माँग सितारों ने भरीझिलमिल-झिलमिल करती हैदुविधा मन की को जानेइन भीगी पलकों  में । देखो…इस चंदा की रीत अनोखीघटता है फिर बढ़ता हैमैं…

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